जय राम????जय जोहार साथियों
????शक्तिस्वरूपा मां बम्लेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर बना श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र।
????1610 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित मां बम्लेश्वरी धाम में पर्यटन विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत लगभग 48 करोड़ रूपए की लागत से डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर एवं डोंगरगढ़ को विकसित किया जा रहा है।
????प्रज्ञागिरि पर्वत को बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में किया जा रहा विकसित।
????श्रीयंत्र के आकार में पर्यटक सुविधा केन्द्र का किया जा रहा निर्माण।
????डोंगरगढ़ पर्वत श्रृंखला की नैसर्गिक सुंदरता मनमोहक।
????डोंगरगढ़ में दर्शनीय स्थल– ऊपर पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर, (रोपवे सुविधा), कामकंदला तालाब में बोटिंग, नीचे मां बम्लेश्वरी मंदिर(लाल पत्थर से अक्षरधाम मंदिर की तरह निर्मित), डोंगरगढ़ की तीन पहाडिय़ों के बीच एक श्रीयंत्र के आकार में पिल्ग्रिम फेसिलिटेशन सेंटर, चंद्रगिरि पहाड़ी में लाल पत्थर से निर्मित विश्वस्तरीय जैन मंदिर एवं आचार्य विद्यासागर जी का समाधिस्थल, प्रज्ञागिरी में ध्यानरत भगवान गौतम बुद्ध की विशाल प्रतिमा।


????डोंगरगढ़ पहुंच मार्ग(सड़क)- कलकत्ता- मुम्बई नेशनल हाईवे मार्ग क्रमांक 6 पर स्थित पश्चिम दिशा की ओर से ग्राम चिचोला से 17 किलोमीटर एवं पूर्व दिशा की ओर ग्राम तुमड़ीबोड़ से 22 किलोमीटर की दूरी पर डोंगरगढ़ नगर स्थित है। डोंगरगढ़ की जिला मुख्यालय राजनांदगांव से दूरी 35 किलोमीटर है।
????रेल मार्ग– हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर डोंगरगढ़ रेलवे जंक्शन है।डोंगरगढ़ नगर मुम्बई-कलकत्ता (व्हाया-नागपुर) के मध्य रेल्वे लाईन एवं हवाई अड्डा पर महाराष्ट्र की उप राजधानी नागपुर (आरेंज सीटी) से 200 किलोमीटर दूर एवं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रेल्वे लाईन एवं हवाई अड्डे से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। डोंगरगढ़ पहुंचने का सुगम माध्यम रेल्वे मार्ग है।
????राजनांदगांव जिले में नागपुर से बिलासपुर के बीच पर्वत श्रृंखला में फैले पर्वत के मध्य सर्वोच्च शिखर पर माँ बम्लेश्वरी देवी का विशाल मंदिर विश्वविख्यात है। मान्यता है कि मां बम्लेश्वरी देवी से भक्तों द्वारा मांगी गई मनोकामना पूर्ण होती है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह मां बम्लेश्वरी की छोटी बहन है। इस पर्वत श्रृंखला की नैसर्गिक सुंदरता मनमोहक है। मंदिर चारों ओर हरे भरे वनों पहाडिय़ों, छोटे-बड़े तालाबों से घिरा हुआ है। पहाड़ी के नीचे कामकंदला तालाब है।
????मां बम्लेश्वरी मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र एवं क्वांर नवरात्र में भक्तों द्वारा मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना की जाती है। दोनों नवरात्र में भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है। जिसमें लाखों की संख्या में भक्त एवं दर्शनार्थी पैदल एवं अन्य माध्यमों से पहुंचते हैं। डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर दर्शन के लिए देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेशों से भी भक्त पर्वत पर बने लगभग 1000 सीढिय़ों की कठिन चढ़ाई कर माता के दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा ऊपर पहाड़ी पर स्थित मंदिर जाने के लिए रोपवे एक अतिरिक्त आकर्षण का केन्द्र है। प्राचीन काल से ही डोंगरगढ़ दर्शनार्थियों की आध्यात्मिक धार्मिक आस्था का केन्द्र है।
????भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना के तहत माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर एवं डोंगरगढ़ विकास के लिए लगभग 48 करोड़ 43 लाख 83 हजार रूपए की लागत से डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर एवं डोंगरगढ़ को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित किया जा रहा है। देश-विदेश से यहां आने वाले दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। जिसके दृष्टिगत यहां अधोसंरचना का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना अंतर्गत मां बम्लेश्वरी मंदिर पहाड़ी एवं इसके आस पास पर्यटन सुविधाएं एवं सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। प्रज्ञागिरि पहाड़ी पर पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही है। माँ बम्लेश्वरी मंदिर विकास के लिए लगभग 7 करोड़ 28 लाख 84 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।
????डोंगरगढ़ स्थिति प्रज्ञागिरि पर्वत जो बौद्ध पर्यटन स्थल एवं बौद्ध तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। प्रज्ञागिरी विकास के लिए 5 करोड़ 54 लाख 59 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पर्वत में तथागत भगवान गौतम बुद्ध की ध्यानस्थ मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। मेडिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया इत्यादि। श्रद्धालुओं के लिए 9.5 एकड़ में डोंगरगढ़ की तीन पहाडिय़ों के बीच एक श्रीयंत्र के आकार में पिल्ग्रिम फेसिलिटेशन सेंटर(पर्यटक सुविधा केंद्र )33 करोड़ 29 लाख 74 हजार रूपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसमें ध्यान केन्द्र, विश्राम कक्ष, प्रसाद कक्ष, सांस्कृतिक मंच, क्लॉक रूम, सत्संग कक्ष, प्रदर्शनी गैलरी, एवं पार्किंग जैसी कई सुविधाएं रहेगी।
????डोंगर का अर्थ पहाड़ और गढ़ का अर्थ दुर्ग होता है, अर्थात डोंगरगढ़ का अर्थ पहाड़ पर स्थित दुर्ग है। डोंगरगढ़ को प्राचीन काल में कामाख्या नगरी, कामावती नगर एवं डुंगराज्य नगर के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में डोंगरगढ़ धर्मनगरी के नाम से विख्यात है। माँ बम्लेश्वरी को बमलाई दाई या दाई बमलाई, माँ बगलामुखी के नाम से भी जाना जाता है।
????मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुये मंदिर कमेटी ने नगर के जन-जन को कमेटी से जोडऩे के लिए सन् 1976 में सार्वजनिक ट्रस्ट का स्वरूप प्रदान किया। मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुये मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर के चहुंमुखी विकास एवं दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु सतत् प्रयास किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप यहां प्रतिदिन एवं चैत्र व क्वांर नवरात्र पर्व के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है।
माँ बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति डोंगरगढ़ द्वारा नीचे मंदिर का भव्य निर्माण नई दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के तर्ज पर गुजरात, राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा कराया गया है। मंदिर में कुल 8 प्रवेश द्वार, 14 फीट 7 इंच की ऊंचाई के 44 पीलर, मंदिर की शिखर सहित कुल ऊंचाई 95 फीट 3 इंच, चौड़ाई 70 फीट एवं लम्बाई 208 फीट है। मंदिर के गर्भ गृह 15 फीट 9 इंच लम्बाई व 15 फीट 9 इंच चौड़ाई है। मंदिर के रंग मंडप की लम्बाई एवं चौड़ाई 41 फीट है। मंदिर का बाहरी भाग बंशीपहाड़पुर राजस्थान के पत्थरों से एवं मंदिर के भीतरी हिस्से व गर्भ गृह में अम्बाजी के मार्बल से सजाया गया है। समिति द्वारा छिरपानी धर्मशाला, ऊपर मंदिर धर्मशाला, नीचे मंदिर धर्मशाला के अलावा नगर में अनेक धर्मशालाएं, लॉज, होटल की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा भोजनालय व रेस्टोरेंट सेवा ऊपर पहाड़ी मंदिर एवं छिरपानी परिसर में उपलब्ध है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा नगरवासियों के लिए बहुत ही सामान्य दर पर चिकित्सालय का संचालन किया जा रहा है जिसे वर्तमान में 100 बिस्तरों वाले सर्वसुविधायुक्त चिकित्सालय में अपग्रेडेशन का कार्य प्रगति पर है। पिछले नवरात्र में मंदिर ट्रस्ट द्वारा नीचे मंदिर में लगभग 1.50 करोड़ रुपए की लागत से 150 किलो चांदी का द्वार लगाया गया तथा ऊपर मंदिर गर्भगृह को स्वर्ण पत्तियों से सुसज्जित किया गया था। हाल ही में मंदिर ट्रस्ट के प्रयासों से शासन ने 4.5करोड़ रूपए की लागत से फूट अंडर ब्रिज की स्वीकृति भी प्रदान की है।
डीजी न्यूज़ डोंगरगढ़
संपादक–विमल अग्रवाल








