जय राम????जय जोहार साथियों
????धान के कटोरे में चांवल का खेल…
????छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य होने के साथ ही “धान का कटोरा” कहलाता है। छत्तीसगढ़ के धान और चावल का वितरण अन्य राज्यों के साथ विदेशों में भी किया जाता है।
????सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ये इस “धान के कटोरे” का दुर्भाग्य है कि छत्तीसगढ के सीमावर्ती नगर डोंगरगढ़ में दूसरे राज्य का चांवल राइस मिलों में धड़ल्ले से आ रहा है।
????मित्रों वर्ष 2023 चुनावी वर्ष है और इस वर्ष खरीफ सीजन में छत्तीसगढ़ में प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदी की घोषणा की गई है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के किसानों को मिले या ना मिले लेकिन डोंगरगढ़ के राइस मिल मालिकों एवं सोसायटी प्रबंधकों के साथ ही सफेद पोश नेताओं की चांदी है क्योंकि इन सब की मिलीभगत से बड़ा लाभ कमाने के उद्देश्य से बड़े षड्यंत्र को अंजाम दिया जा रहा है।
????चूंकि छत्तीसगढ़ में धान का समर्थन मूल्य अन्य पड़ोसी राज्यों से अधिक है। पड़ोसी राज्यों से बिना अनुमति धान खरीदी ना कर पाने की स्तिथि में मिलर्स के द्वारा धड़ल्ले से बड़ी मात्रा में चांवल मंगाकर संग्रहण किए जाने की जानकारी मिली है।
????आश्चर्य तब होता है जब धान खरीदी के सीजन में भी ना कोई नाका है ना जांच चौंकी। सूत्रों से ज्ञात हुआ कि नाममात्र की जांच चौंकी में कर्मचारी हमेशा नदारद रहते हैं और ड्यूटी में रहते भी हैं तो कुछ लेनदेन करके वाहन को पास करा देते हैं।
????धान खरीदी केंद्र में बाकायदा किसानों को टोकन देकर बायोमेट्रिक तरीके से खरीदी की जाती है और दूसरे राज्यों के धान को रोकने विशेष पुलिस बल के साथ ही खरीदी केंद्र में सीसीटीवी कैमरा भी लगाए जाते रहे हैं लेकिन ये भ्रष्टाचार का नया तरीका है इसे शासन प्रशासन कैसे रोकती है देखना दिलचस्प होगा।
????मित्रों ऐसा हो नहीं सकता कि शासन प्रशासन को इसकी खबर तक ना हो। और अंत में वो कहावत तो आपने भी सुनी होगी- “जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का”
????बहरहाल हम इस मामले में अपनी नज़र बनाए रखेंगे और यथाशीघ्र इन सफेद पोश नेताओं के साथ ही भ्रष्ट अधिकारीयों की काली करतूत का पर्दाफाश करेंगे जिससे छत्तीसगढ़ के किसानों का अधिकार कोई और ना ले पाए और ना ही छत्तीसगढ़ के राजकोष पर किसी की गिद्ध नजर पड़े।
विमल अग्रवाल की रिपोर्ट✍️
डी.जी.न्यूज????डोंगरगढ़







