ग्राम घुपसाल बना एक मिसाल
🔷पिछले 4 साल से तालाब सूखा था इस वर्ष पानी ठहरा हुआ और मवेशियों एवं ग्रामीणों के लिए पानी की सुविधा बनी हुई।

राजनांदगांव- छुरिया विकासखंड का ग्राम घुपसाल जनभागीदारी, जल संरक्षण एवं फसल चक्र परिवर्तन के सफल क्रियान्वयन से राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने ग्राम के दौरे के दौरान ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास, एकजुटता एवं जनशक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि कम पानी वाली फसलों को अपनाने और जल संरक्षण के उपायों के कारण ग्राम में भू-जल स्तर में सुधार हुआ है तथा जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जो अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत है। कलेक्टर ने कहा कि ग्राम घुपसाल ने जिस प्रकार अधिक पानी वाली फसल धान के स्थान पर कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाया है, वह एक अनुकरणीय पहल है। यह निर्णय न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में कृषि को टिकाऊ बनाने की दिशा में भी सार्थक कदम है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां धान की फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, वहीं मक्का एवं अन्य दलहन-तिलहन फसलों में अपेक्षाकृत बहुत कम पानी लगता है। कलेक्टर ने ग्राम की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि जहां एक परिवार में भी निर्णय लेना कठिन होता है, वहां पूरे गांव द्वारा एकमत होकर फसल परिवर्तन करना ग्राम की जागरूकता और सामाजिक एकता को दर्शाया है।
कलेक्टर ने कहा कि जनभागीदारी से ही गांवों का समग्र विकास संभव है। जिला प्रशासन द्वारा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सतत् प्रयास किए जा रहे हैं।
अध्यक्ष जिला पंचायत किरण वैष्णव ने कहा कि ग्राम के किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों ने मिलकर जो कार्य किया है, वह अत्यंत सराहनीय है। पहले जहां अधिक पानी वाली धान फसल के कारण गर्मी में जल संकट उत्पन्न होता था, वहीं अब मक्का एवं अन्य कम पानी वाली फसलों के कारण गांव में पर्याप्त जल उपलब्ध है। यह परिवर्तन ग्रामीणों की मेहनत और जागरूकता का परिणाम है। ग्राम घुपसाल का यह प्रयास न केवल जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। पद्मश्री फूलबासन यादव ने सराहना करते हुए कहा कि ग्राम घुपसाल में जल संरक्षण एवं फसल चक्र परिवर्तन अभियान की ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास प्रेरणादायक है। यह कार्य केवल किसी एक व्यक्ति, अधिकारी या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे गांव, किसानों, महिला समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा जिला एवं जनपद प्रशासन के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज के समय में धन, संसाधन और सुविधाएं खरीदी जा सकती हैं, लेकिन पानी का कोई विकल्प नहीं है। यदि समय रहते जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। ग्राम घुपसाल ने जनभागीदारी के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि सामूहिक संकल्प से बड़े से बड़े कार्य संभव हैं।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत सरपंच एवं ग्राम के किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले ग्राम में पानी की बहुत समस्या होती थी। लेकिन इस वर्ष धान की जगह मक्का एवं दलहन-तिलहन फसल लेने से पानी की समस्या नहीं हो रही है। किसानों ने बताया कि पूर्व में गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर नीचे चले जाने से सूखे जैसी स्थिति बन जाती थी। मार्च माह के बाद गांव के तालाब, हैंडपंप एवं नालों में पानी नहीं रहता था, जिससे पेयजल एवं निस्तारी की गंभीर समस्या उत्पन्न होती थी। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम के सामूहिक प्रयास एवं महत्वपूर्ण निर्णय से इस वर्ष लगभग 350 एकड़ से अधिक रकबे में रबी मौसम में मक्का एवं अन्य दलहन-तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों का उत्पादन किया गया है। इसके परिणामस्वरूप ग्राम में भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है तथा पेयजल एवं निस्तारी कार्यों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां पूर्व में फागुन माह के बाद तालाब सूख जाते थे, वहीं इस वर्ष अभी भी निस्तारी के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुरूचि सिंह, सीईओ छुरिया होरी लाल साहू, सरपंच नरेश शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान उपस्थित थे।
विमल अग्रवाल
संपादक-डीजी न्यूज़








