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बागनदी वन परिक्षेत्र में किए गए कार्यों में अनियमितता का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग।
रेंजर पर सेवानिवृत्ति से पहले हड़बड़ी में लीपापोती कार्य कराने का आरोप।
राजनांदगांव- बागनदी वन परिक्षेत्र में वर्तमान में कराए जा रहे विभिन्न कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी सूरजबली सिन्हा की अक्टूबर माह में प्रस्तावित सेवानिवृत्ति के बीच उनके कार्यकाल में कराए गए कार्यों की जांच की मांग स्थानीय स्तर पर उठ रही है। स्थानीय लोगों और सूत्रों ने सर्वे सीमांकन, लाइनिंग, वृक्ष कटाई एवं अन्य कार्यों में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बारिश के मौसम में कार्य कराने पर सवाल-
बताया गया है कि कूप क्रमांक-7, बीट क्रमांक-511 गोपालपुर क्षेत्र में सर्वे सीमांकन, लाइनिंग, वृक्ष कटाई सहित अन्य कार्य कराए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ कार्य समय पर नहीं कराए गए और अब बारिश के मौसम में जल्दबाजी में उन्हें पूरा कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा यदि नियमों के विपरीत हरे वृक्षों की कटाई अथवा अन्य कार्य कराए गए हैं तो इसकी जांच आवश्यक है।
पुरानी तारीख में कार्य दर्शाने की आशंका-
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ कार्य मौके पर सीमित रूप से कराए जाने के बाद दस्तावेजों में पूर्व की तारीख दर्शाकर भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई है। हालांकि, इस संबंध में कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए कार्यादेश, स्वीकृति पत्र, माप पुस्तिका, ले-आउट, मस्टर रोल, बिल-बाउचर और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की जा रही है।
गोपालपुर-तेलीबांधा डब्ल्यूबीएम सड़क भी जांच के दायरे में-
रेंजर सिन्हा के कार्यकाल में वर्ष 2025 में गोपालपुर से तेलीबांधा तक डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर इसकी लागत करीब पांच लाख रुपये बताए जाने के साथ सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सड़क निर्माण में पर्याप्त मात्रा में मुरुम का उपयोग नहीं किया गया। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वीकृत लागत, सड़क की लंबाई, निर्धारित कार्य मात्रा, उपयोग की गई सामग्री और भुगतान रिकॉर्ड का मौके की स्थिति से मिलान कराने की मांग की गई है।
भौतिक सत्यापन से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति-
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। वरिष्ठ वन अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर सर्वे सीमांकन, लाइनिंग, वृक्ष कटाई, सड़क निर्माण सहित अन्य कार्यों का भौतिक सत्यापन करना चाहिए। इससे दस्तावेजों में दर्ज कार्य और मौके पर हुए कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सेवानिवृत्ति से पहले जांच की मांग-
स्थानीय लोगों ने रेंजर सिन्हा के कार्यकाल में कराए गए कार्यों की सूची तैयार कर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अक्टूबर में प्रस्तावित सेवानिवृत्ति से पहले यदि रिकॉर्ड और कार्यों की जांच नहीं की गई तो किसी भी संभावित अनियमितता की जिम्मेदारी तय करना कठिन हो सकता है। वहीं, जांच में आरोप निराधार पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
रेंजर से संपर्क का प्रयास, फोन रिसीव नहीं हुआ-
मामले में रेंजर सिन्हा का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में अब वन विभाग के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और मौके पर कार्यों के भौतिक सत्यापन की मांग की जा रही है।
अब देखना यह है कि वन विभाग के उच्चाधिकारी बागनदी वन परिक्षेत्र में वर्तमान एवं पूर्व में कराए गए कार्यों का मौके पर निरीक्षण कर दस्तावेजों का सत्यापन कराते हैं या नहीं रेजर के रिटायरमेंट के पहले मामले पर जांच नहीं किया गया तो शासकीय राशि का नूकसान होना तय है? फिलहाल क्षेत्र में मामले को लेकर चर्चा तेज है और स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
विमल अग्रवाल
संपादक-डीजी न्यूज़






