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राजनांदगांव- सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से छह राज्यों में हुई 91 लाख 85 हजार रुपए की साइबर ठगी की राशि प्राप्त कर आगे हस्तांतरित की गई थी। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, भारत सरकार के गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई। जांच में सामने आया कि आईसीआईसीआई बैंक के विभिन्न खातों का उपयोग 91.85 लाख रुपए की साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे हस्तांतरित करने के लिए किया गया।
मामले में सिटी कोतवाली राजनांदगांव में भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(4), 317(5) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया। इससे पहले 3 अक्टूबर को धनीराम सिन्हा पिता हीराराम सिन्हा (43), निवासी ग्राम जामरी, थाना डोंगरगढ़ को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा चुका है।

🔷कमीशन के लालच में न दें बैंक खाता- पुलिस ने बताया कि म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने, दूसरे खातों में ट्रांसफर करने अथवा निकालने के लिए करते हैं। अपराधी अक्सर कमीशन या अन्य लालच देकर लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें और किसी भी प्रकार के कमीशन या बड़ी रकम के लालच में न आएं। बैंक खाते के लेन-देन की नियमित जांच करें तथा संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें।
🔷क्या है म्यूल अकाउंट- ऐसा बैंक खाता जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धनराशि को छिपाने स्थानांतरित करने अथवा निकालने के लिए करते हैं।
🔷म्यूल अकाउंट कैसे काम करता है- अपराधी किसी व्यक्ति को लालच देकर या धोखे से उसका बैंक खाता उपयोग करने की अनुमति प्राप्त करते हैं। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि उस खाते में जमा की जाती है, इसके बाद राशि को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता है ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन का स्त्रोत पता लगाना कठिन हो जाए।
🔷म्यूल अकाउंट धारक कौन हो सकते हैं- ऐसे व्यक्ति जिन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनके खाते का गलत उपयोग किया जा रहा है।
आर्थिक रूप से कमजोर लोग जिन्हें कमीशन या लालच देकर फंसाया जाता है।ऐसे व्यक्ति जो जानबूझकर अपराधियों की सहायता करते हैं।
🔷इससे बचने के उपाय- 1) किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम न दें।
2) किसी भी प्रकार के कमीशन या बड़ी रकम के लालच में न आएं।
3) अपने बैंक खाते के लेन.देन की नियमित जांच करें किसी भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर सेल को दें।
🔷राजनांदगांव पुलिस की अपील- किसी के कहने पर अपना बैंक खाता मोबाईल सिम, चेकबुक अथवा एटीएम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें। साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग गेमिंग एप, गैंबलिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटर्शन, डिजिटल अरेस्ट एवं अन्य प्रकार की साइबर ठगी में करते हैं। खाता किराये पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना अथवा बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के माध्यम से साइबर अपराध में सहयोग करने वाले खाता धारकों तथा ऐसे खातों की व्यवस्था करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
विमल अग्रवाल
संपादक-डीजी न्यूज़








