राजनांदगांव- नेशनल हाईवे पर गौवंश की सुरक्षा बनी चुनौती

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रोजाना सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे मवेशी, कई की मौत तो कई गंभीर रूप से घायल-

राजनांदगांव- राजनांदगांव जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे क्रमांक-53 पर आवारा गौवंश की मौजूदगी लगातार गंभीर समस्या बनती जा रही है। हाईवे पर सड़क पार करते या सड़क किनारे बैठे गौवंश आए दिन तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ रहे हैं। इससे जहां बड़ी संख्या में गौवंश की मौत हो रही है, वहीं कई मवेशी गंभीर रूप से घायल होकर सड़क किनारे तड़पते नजर आते हैं। यह स्थिति न केवल पशु सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है, बल्कि वाहन चालकों के लिए भी गंभीर दुर्घटना का खतरा पैदा कर रही है।

हाल की तस्वीरें हाईवे की भयावह स्थिति को बयां कर रही हैं। कहीं दुर्घटना में घायल गौवंश सड़क किनारे पड़ा दिखाई दे रहा है तो कहीं मृत मवेशी के पास आवारा कुत्ते मंडराते नजर आ रहे हैं। हाईवे पर इस तरह के हादसे लगातार सामने आने से जिम्मेदार विभागों की व्यवस्था और निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर की नाराजगी-

कलेक्टर ने 25 अगस्त को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हाल ही में नेशनल हाईवे पर एक दर्जन से अधिक गौवंश की सड़क दुर्घटना में मृत्यु पर नाराजगी जताते हुए हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर विशेष निगरानी रखने के साथ ही सड़क पर बैठे मवेशियों को हटाने एवं उनके गले में रेडियम पट्टा लगाने के निर्देश दिए।

कलेक्टर के निर्देश के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हाईवे पर बैठे गौवंशों को सड़क से हटाने की मुहिम चलाई गई उसके बावजूद समस्या जस की तस। प्रशासन और NHAI की पहल के बावजूद हाईवे पर गौवंश की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। सड़क किनारे चारे की तलाश में पहुंचने वाले मवेशी अक्सर हाईवे पर आ जाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच इनके अचानक सड़क पर आने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

गौवंश के दुर्घटनाग्रस्त होने से वाहन चालकों की जान भी जोखिम में पड़ती है। विशेषकर रात और बारिश के दौरान सड़क पर मवेशियों का दिखाई देना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वाहन की रफ्तार अधिक होने पर चालक को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।

स्थायी समाधान की जरूरत-

गौवंश को केवल दुर्घटना के बाद सड़क से हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। हाईवे के संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां नियमित निगरानी, पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था और संबंधित निकायों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। साथ ही पशुपालकों को अपने मवेशियों को खुले में छोड़ने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।

लगातार हो रही दुर्घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि गौवंश की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों को महज औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए नियमित और प्रभावी बनाया जाना जरूरी है। हाईवे पर गौवंश की जान बचाने के साथ-साथ वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब ठोस और स्थायी कदम उठाने की जरूरत है।

विमल अग्रवाल

संपादक-डीजी न्यूज़

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