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बगुला प्रकरण में उपवनक्षेत्रपाल निलंबित, निलंबन वापसी के दबाव के आरोप से उठे सवाल

2673 पेड़ों की कटाई के दौरान बगुलों की मौत का मामला- सरकारी आदेश में निरीक्षण व पर्यवेक्षण में लापरवाही का उल्लेख
राजनांदगांव- डोंगरगांव क्षेत्र के ग्राम जंगलपुर में पेड़ों की कटाई के दौरान बगुला प्रजाति के पक्षियों की मौत के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई की है। मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्र), दुर्ग वृत्त द्वारा 09/09/2026 को जारी आदेश क्रमांक 463, के तहत उपवनक्षेत्रपाल डोंगरगांव विनोद कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय वनमंडल राजनांदगांव निर्धारित किया गया है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डोंगरगांव के आदेश क्र. 1111/प्र-1/अ.वि.अ./2026, दिनांक 28.04.2026 के तहत राजनांदगांव से डोंगरगांव सड़क चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य के लिए शासकीय राजस्व भूमि में 2673 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी।
कटाई के दौरान डोंगरगांव सर्किल के अर्जुनी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जंगलपुर में बगुला प्रजाति के पक्षियों के घोंसले वाले पेड़ों की भी कटाई हो गई। पेड़ गिरने से 4-5 बगुलों की मौत हुई, जबकि 13 छोटे एवं 40 बड़े बगुलों के बच्चों को रेस्क्यू कर वन चेतना केंद्र, मनगट्टा भेजा गया।
मुख्य वन संरक्षक दुर्ग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि उपवनक्षेत्रपाल विनोद कुमार मिश्रा द्वारा कार्यक्षेत्र का निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण नहीं किए जाने के कारण यह घटना घटित हुई। इसी आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है।
सूत्रों के अनुसार सरकारी आदेश से उपवनक्षेत्रपाल पर कार्रवाई तो हो गई लेकिन डिप्टी रेंजर मिश्रा की निलंबन वापसी के लिए राजनैतिक दबाव है।
विदित है कि ग्राम जंगलपुर में शासकीय आदेश से कटाई कार्य में लगे मजदूरों पिलूराम पिता माखनलाल निषाद, निर्मल पिता खिलावन निषाद, चेतन पिता हरि निषाद तीनों निवासी ग्राम कुम्हलोरी एवं कृष्णा कुमार पिता ओमकार वैष्णव निवासी पारीखुर्द पर वन विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए बगुला के 61 बच्चे, एक कटर मशीन, 24 इंच का आरा एवं चैन जब्त कर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 2 का 16(सी) एवं धारा 9 के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही मजदूरों पर 25000 अर्थदंड लगाने की बात भी सामने आ रही है।
बगुलों की मौत के लिए वास्तविक रूप से जिम्मेदार कौन है और पूरे प्रकरण में जवाबदेही किस स्तर तक तय होगी? यह सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही होगी या उन्हें बचाने में पूरा सिस्टम लग जाएगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए गरीब मजदूरों को ही बलि का बकरा बना दिया जाएगा? जिन मजदूरों के पास ना तो कार्य के निरीक्षण का अधिकार था ना ही पर्यवेक्षण का, वे तो बस अपने अधिकारी के आदेश की पालना किए फिर उन्हें दंड किस बात का मिला?
विमल अग्रवाल
संपादक-डीजी न्यूज़






