जय राम🙏जय जोहार साथियों
आरटीओ कर्मचारी ने करोड़ों रूपए का गबन कर आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित की।
फिर दो पुत्रों के कथित अपहरण के बाद जमीन हड़पने के आरोपों से मामला चर्चा में।
सरपंच पति के अपहरण से जुड़े आरोपों के पीछे क्या है पूरा सच? सरपंच के ससुर (आरटीओ अधिकारी/कर्मचारी) पर करोड़ों रूपए के गबन और आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का आरोप का राज?
किसने हड़पी आरटीओ अधिकारी/कर्मचारी की 22 एकड़ जमीन? छत्तीसगढ़ जैसे शांत प्रदेश में ऐसे तमाम दावों ने खड़े किए कई गंभीर सवाल।
राजनांदगांव- छूरिया ब्लॉक की एक पंचायत की आदिवासी सरपंच के पति का हाल ही में कथित अपहरण कर लिया गया था।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दुर्ग में पदस्थ आरटीओ अधिकारी साहू के द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी मंडावी(निवासी केशो खैरी) को करोड़ों रूपए गबन के मामले में प्रताड़ित किया गया जिससे मंडावी ने vrs लेकर नौकरी छोड़ दिया। सूत्रों के अनुसार मंडावी ने आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के बाद जेसीबी, डम्फर, लक्ज़री कारें आलीशान घर, प्रॉपर्टी इत्यादि में पैसों का इन्वेस्ट किया है।
अब (आरटीओ अधिकारी दुर्ग) साहू के द्वारा मंडावी से अकेले गबन किए गए करोड़ों रूपए में अपना हिस्सा मांगने पर नहीं देने से बनी अपहरण की योजना-
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम केशो खैरी निवासी आरटीओ विभाग से vrs ले चुके मंडावी की बहु छुरिया ब्लॉक में एक पंचायत की सरपंच है और मंडावी ने गबन के पैसे नहीं दिए तो उसके दो बेटों(सरपंच पति सहित) को (आरटीओ अधिकारी दुर्ग) साहू के द्वारा उसके गृह ग्राम से अपहरण करवा लिया गया।
दुर्ग में बनी भूमि हड़पने की योजना?
सूत्रों के अनुसार दुर्ग में पदस्थ आरटीओ अधिकारी साहू ने अपने अधीनस्थ मंडावी के पुत्रों का अपहरण कर दबाव पूर्वक 22 एकड़ भूमि को अपने किसी परिचित के नाम करवाया गया है।
बताया जा रहा है कि आरटीओ दुर्ग में पदस्थ रहे एक अधिकारी साहू पर आरटीओ कर्मचारी मंडावी के परिवार से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और दबाव बनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि मंडावी के पुत्रों के कथित अपहरण के जरिए परिवार पर दबाव बनाया गया था। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
मामले का एक अहम सवाल यह भी है कि यदि अपहरण जैसी गंभीर घटना वास्तव में हुई थी, तो क्या इसकी पुलिस में एफआईआर दर्ज हुई थी या नहीं? यदि शिकायत की गई थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह भी जांच का विषय है।
इसी विवाद से 22 एकड़ जमीन पर कथित कब्जे/हड़पने से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। जमीन के दस्तावेज, स्वामित्व, लेन-देन तथा संबंधित पक्षों के बीच हुए समझौते या विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर सामने आ सकेगी।
आखिर इस पूरे मामले के पीछे का सच क्या है?
एक ओर करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन में जमीन हड़पने के आरोप हैं, तो दूसरी ओर कथित अपहरण और पुलिस में एफआईआर नहीं होने का सवाल सामने है। ऐसे में एक आरटीओ कर्मचारी के आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने समेत पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, राजस्व अभिलेखों की पड़ताल और संबंधित पक्षों के बयान बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर डीजी न्यूज़ इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता। संबंधित अधिकारियों, पुलिस और आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विमल अग्रवाल
संपादक-डीजी न्यूज़






