राजनांदगांव–पैरा(पराली)दहन पर्यावरण के लिए गंभीर समस्या।

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जय राम????जय जोहार साथियों

????आज इंसान इतना स्वार्थी हो गया है कि अपने हिस्से का भोजन तो खा ही रहा है साथ ही गौमाता के हिस्से का भी….

????पैरा दान ना होकर पैरा दहन किया जा रहा है।

???? पैरा दहन पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा।

????जिले के सभी गांवों में अधिकांश किसानों द्वारा फसल काटने के बाद पैरा जलाया जा रहा है जिससे बड़ी मात्रा में वायु प्रदूषण हो रहा है। जबकि पैरा जलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत गैरकानूनी है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में बहुत सख्त है। दिल्ली पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में पैरा(पराली) जलाना एक गंभीर समस्या बन गई है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार को पर्यावरण अधिनियम के तहत पैरा (पराली) जलाने पर 5 हजार से लेकर 30हजार तक अर्थदंड की व्यवस्था करनी पड़ी। इसके बावजूद ये समस्या कम होने के बजाय दिन प्रतिदिन अपने पैर पसार रही है। आइए जानते हैं पैरा(पराली)जलाने का कारण उससे होने वाले नुकसान और पैरा के उपयोग के बारे में –
????पैरा जलाने का कारण–डीजी न्यूज़ द्वारा पैरा (पराली) जलाने को लेकर जब बहुत से किसानों से जानकारी ली गई तो जो सबसे प्रमुख कारण सामने आया वो है मजदूरों की कमी। क्योंकि आधुनिक मशीनी युग में कृषि संबंधी अधिकांश कार्य मशीनों से हो रहे हैं और दूसरा बड़ा कारण है जागरुकता की कमी। कृषि विभाग द्वारा नुक्कड़ नाटकों, पंचायतों एवं धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से इस सम्बन्ध में जानकारी दी जाए तो समय रहते इस समस्या को विकराल होने से रोका जा सकता है।

????पैरा(पराली) जलाने से नुकसान–
????पर्यावरण को नुकसान– ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन का खतरा। पराली जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फ़र ऑक्साइड और मीथेन जैसी जहरीली गैसें निकलती है इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और दिन में ही धुंध छा जाती है।

????मानव जीवन पर असर– इससे सांस लेने में तकलीफ़, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, सिर दर्द, कैंसर, एलर्जी, आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती है।
????मिट्टी की गुणवत्ता पर असर– पराली जलाने से मिट्टी में पाया जाने वाला रायजोबिया बैक्टीरिया नष्ट हो जाता है जो वायुमंडल की नाइट्रोजन को अवशोषित कर फसलों तक पहुंचाता है। विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव भी नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उर्वरक क्षमता में कमी आती है।
????आग लगने का खतरा

????पशु और वन्यजीवों के लिए खतरनाक।

????पैरा(पराली) का उपयोग– पशुओं के चारे के साथ ही किसान उसका इस्तेमाल जैविक खाद बनाने, बायोमास एनर्जी, छप्पर बनाने, मशरूम आदि की खेती में कर सकते हैं।

डीजी न्यूज़ डोंगरगढ़

संपादक–विमल अग्रवाल

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