जय राम🙏जय जोहार साथियों
🔷1 अक्टूबर स्वैच्छिक रक्तदान दिवस विशेष आलेख- रक्तरत्न प्रितम राजाभोज
मित्रों 1 अक्टूबर स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के रूप में मनाया जाता है, वैसे तो साल का हर दिन रक्तदान दिन होना चाहिए क्योंकि हर दिन कहीं ना कहीं कोई ना कोई रक्तदान करके किसी ना किसी को जीवनदान दे रहा होता है, उन सभी स्वैच्छिक रक्तदाताओं को प्रणाम है जो अपना रक्त देकर किसी का जीवन बचाते हैं। जब एक स्त्री बच्चे को जन्म देती है तब वो जननी कहलाती है, हम सब उस माँ के सम्मान में नतमस्तक हो जाते हैं तो सोचो जब एक रक्तदाता अपना रक्त देकर किसी का जीवन बचाता है तब वो सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार को जीवनदान देता है, क्योंकि वो एक व्यक्ति किसी का पिता हो सकता जो अपने पूरे परिवार का निर्वहन करता है, वो किसी की माँ हो सकती है जो अपने बच्चों का संसार होती है, वो किसी के बच्चे हो सकते हैं जो अपने बूढ़े माता पिता के बुढ़ापे की लाठी, पेंशन और देश का भविष्य होते हैं।
आज जितना जरूरी स्वैच्छिक रक्तदान करना है उतना ही जरूरी रक्तदाता तैयार करना भी है, हर किसी का यह लक्ष्य होना चाहिए कि जो व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकते वह कम से कम 2 लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित जरूर करें।
थेलेसिमीया, एनीमिया, सिकलसेल के मरीजों , दुर्घटनाग्रस्त मरीजों या अन्य किसी भी सर्जरी के लिए एवं गर्भवती माताओं के लिए रक्त की आवश्यकता होती है। थेलेसिमीया के मरीजों को हर 15 से 20 दिन में एक यूनिट ब्लड की आवश्यकता होती है तो किसी किसी मरीजों को 2 यूनिट ब्लड की आवश्यकता होती है, सर्दियों के मौसम में जरूरतमंदों को रक्त आसानी से उपलब्ध हो जाता है परंतु गर्मियों के मौसम में रक्त की भारी कमी हो जाती है, उस समय स्वैच्छिक रक्तदाता भी उतनी संख्या में नहीं मिल पाते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों से आये मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वे शहर आकर रक्तदाताओं के लिए भटकते रहते हैं।
🔴बल्ड ग्रुप जाँच की विशेष मुहिम शुरू हो-
नए रक्तदाता निर्माण करने के लिए जनजागरण कर रक्तदान के महत्व व फायदे समझाने की आवश्यकता है, अपने रक्त को साफ रखने के लिए नई पीढ़ी को शराब, सीगरेट, तंबाकू जैसे मादक पदार्थों से दूर रहकर तनावमुक्त जीवन जीना चाहिए।
मेरा मानना है की हर गांव की ग्राम पंचायत तथा प्रायमरी हेल्थ सेंटर में रक्त ग्रुप की जाँच कर रक्तदाताओं की सूची उपलब्ध होनी चाहिए ताकि उस गांव के लोगों को समय पर रक्त मिल पाए ऐसा होने से शहर के रक्त बैंक और रक्तदाताओं पर दबाव कम पड़ेगा।
🔴स्वैच्छिक रक्तदान के लिए महिलाएं, युवा, विविध समाज तथा संस्थाएँ आ रही है सामने-
आज से 28 वर्ष पहले जब मैंने समाजकार्य की शुरुवात की तब मैंने रक्तदान को प्रथम रखा क्योंकि रक्त का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, रक्त की कमी रक्त से ही पूरी होती हैं, मैंने रक्तदान तो किया ही साथ में रक्तदाता भी तैयार किये। रक्तदान शिविरों का आयोजन किया, अपने अनुभवों को मैंने समाज के विभिन्न अंगो तक पहुंचाने का प्रयत्न किया, मैंने रक्तदाताओं को उत्कृष्ट रक्तदान शिविर आयोजक कैसे बनें इस पर मार्गदर्शन किया, शुरुवाती दिनों मे मैंने विविध समाज, संस्था, कॉलेज, बैंक जाकर तथा संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आमने सामने रहकर इस नेक कार्य करने तथा करवाने के लिए प्रोत्साहित किया, मैंने लोगों को अपने शादी की सालगिरह, जन्मदिवस, अपनों के जन्मदिवस पर रक्तदान कर मनाने, साथ ही हमारे अपने जिन्हें हमने हमेशा के लिए खो दिया उन्हें रक्तदान के मध्यम से सच्ची श्रद्धांजली देने के लिए समझाया, सौभाग्य से मेरे इस सफर में बहुत अच्छे लोग भी मिले जिन्होंने मेरे इस सेवाकार्य को समझा और मेरे साथ वे भी इस महान कार्य में आगे बढ़े, आज वे खुद अपने अपने समाज, संस्था में और किसी भी शुभ कार्य के उपलक्ष में रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं।
मैं सभी स्वैच्छिक रक्तदाताओं, रक्तदान शिविर आयोजकों तथा सामान्य चिकित्सालय रक्तबैंक भंडारा का हृदय से आभारी हूँ जिनका समय समय पर योगदान मिलता रहा है, मैं इन सभी को तथा समस्त देशवासियों को स्वैच्छिक रक्तदान दिवस की शुभकामनाएं देता हूँ।
रक्तरत्न, प्रितमकुमार रामरतन राजाभोज,
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, भंडारा, महाराष्ट्र।
गेस्ट एडिटर–डीजी न्यूज़ डोंगरगढ़








